Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.10.50-51h: वैशम्पायन जी कहते हैं, 'हे जनमेजय! साम्ब के धर्मसम्मत और उत्तम गुणों से युक्त वचन सुनकर सारी प्रजा आदरपूर्वक उसकी स्तुति करने लगी और सबने उसके वचनों का अनुमोदन किया।   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  15.10.50-51h 
वैशम्पायन उवाच
तस्य तद् वचनं धर्म्यमनुमान्य गुणोत्तरम्॥ ५०॥
साधु साध्विति सर्व: स जन: प्रतिगृहीतवान्।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं, 'हे जनमेजय! साम्ब के धर्मसम्मत और उत्तम गुणों से युक्त वचन सुनकर सारी प्रजा आदरपूर्वक उसकी स्तुति करने लगी और सबने उसके वचनों का अनुमोदन किया।
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! On hearing Samba's words which were in accordance with Dharma and full of excellent qualities, all the subjects started praising him with respect and everybody approved of his words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)