Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.10.43-44h: 'भरतवंश के रत्न ये युधिष्ठिर शत्रुओं पर भी दया करने वाले और परम पवित्र हैं। बुद्धिमान होने के साथ-साथ ये सबको सरलता से देखते हैं और हम लोगों से सदैव अपने पुत्रों के समान व्यवहार करते हैं।॥43 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'भरतवंश के रत्न ये युधिष्ठिर शत्रुओं पर भी दया करने वाले और परम पवित्र हैं। बुद्धिमान होने के साथ-साथ ये सबको सरलता से देखते हैं और हम लोगों से सदैव अपने पुत्रों के समान व्यवहार करते हैं।॥43 1/2॥
‘This Yudhishthira, the jewel of the Bharat clan, is merciful even to his enemies and is extremely pure. Along with being intelligent, he looks at everyone with simplicity and always treats us like his own children.॥ 43 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥