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mahabharat 15.10.41-42h: यह पृथ्वीनाथ पाण्डु पुत्र युधिष्ठिर अपने द्वारा दिये गये अग्रहार (दान में दिये गये ग्राम) तथा परिबार्ह (पुरस्कार में दिये गये ग्राम) तथा पूर्ववर्ती राजाओं द्वारा ब्राह्मणों को दिये गये ग्रामों की भी रक्षा करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  15.10.41-42h 
ब्रह्मदेयाग्रहारांश्च पारिबर्हांश्च पार्थिव:॥ ४१॥
पूर्वराजाभिपन्नांश्च पालयत्येव पाण्डव:।
 
 
अनुवाद
यह पृथ्वीनाथ पाण्डु पुत्र युधिष्ठिर अपने द्वारा दिये गये अग्रहार (दान में दिये गये ग्राम) तथा परिबार्ह (पुरस्कार में दिये गये ग्राम) तथा पूर्ववर्ती राजाओं द्वारा ब्राह्मणों को दिये गये ग्रामों की भी रक्षा करते हैं।
 
This Prithvinath Pandu's son Yudhishthira also protects the Agraharas (villages given as donations) and Paribarhas (villages given as rewards) given by him and those offered by earlier kings to the Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)