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mahabharat 15.10.36-37h: आप इस सम्पूर्ण जगत् के स्वामी हैं; इसलिए हम आपको अपना गुरु मानते हैं और आप धर्मात्मा राजा को वन में जाने की आज्ञा देते हैं तथा आपके पुत्र दुर्योधन के लिए हमारा यह कथन है -॥36 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  15.10.36-37h 
गुरुर्मतो भवानस्य कृत्स्नस्य जगत: प्रभु:॥ ३६॥
धर्मात्मानमतस्तुभ्यमनुजानीमहे सुतम्।
 
 
अनुवाद
आप इस सम्पूर्ण जगत् के स्वामी हैं; इसलिए हम आपको अपना गुरु मानते हैं और आप धर्मात्मा राजा को वन में जाने की आज्ञा देते हैं तथा आपके पुत्र दुर्योधन के लिए हमारा यह कथन है -॥36 1/2॥
 
You are the Lord of this entire universe; therefore we accept you as our Guru and you allow the righteous king to go to the forest and this is our statement for your son Duryodhana -॥ 36 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)