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mahabharat 15.10.29-31: महाराज! उस युद्ध में अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ एकत्रित हुई थीं; परंतु कौरव पक्ष के भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य आदि प्रमुख योद्धाओं तथा महारथी कर्ण तथा पाण्डव समूह के सात्यकि, धृष्टद्युम्न, भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि सभी को उसने अठारह दिन के भीतर ही मार डाला ॥29-31॥   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 29-31
 
 
श्लोक  15.10.29-31 
अक्षौहिण्यो महाराज दशाष्टौ च समागता:॥ २९॥
अष्टादशाहेन हता: कुरुभिर्योधपुङ्गवै:।
भीष्मद्रोणकृपाद्यैश्च कर्णेन च महात्मना॥ ३०॥
युयुधानेन वीरेण धृष्टद्युम्नेन चैव ह।
चतुर्भि: पाण्डुपुत्रैश्च भीमार्जुनयमैस्तथा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस युद्ध में अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ एकत्रित हुई थीं; परंतु कौरव पक्ष के भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य आदि प्रमुख योद्धाओं तथा महारथी कर्ण तथा पाण्डव समूह के सात्यकि, धृष्टद्युम्न, भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि सभी को उसने अठारह दिन के भीतर ही मार डाला ॥29-31॥
 
Maharaj! Eighteen Akshauhini armies had gathered in that war; But the chief warriors of the Kaurava side, Bhishma, Drona, Kripacharya etc. and the great man Karna and the chief warriors of the Pandava group, Satyaki, Dhrishtadyumna, Bhimsen, Arjun, Nakul and Sahadev etc. killed everyone within eighteen days. 29-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)