Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.10.26-27h: कुरुनन्दन! आपके और आपके पुत्र के द्वारा किया गया कोई भी छोटा-मोटा अपराध हमें देखने में नहीं आया है। महाभारत युद्ध में अपने जाति-बंधुओं के संहार के सम्बन्ध में आपने दुर्योधन के जो अपराध का उल्लेख किया है, उसके सम्बन्ध में भी मैं आपसे निवेदन करूँगा।॥26 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुसूक्ष्मं च व्यलीकं ते सपुत्रस्य न विद्यते।
यत् तु ज्ञातिविमर्देऽस्मिन्नात्थ दुर्योधनं प्रति॥ २६॥
भवन्तमनुनेष्यामि तत्रापि कुरुनन्दन।
अनुवाद
कुरुनन्दन! आपके और आपके पुत्र के द्वारा किया गया कोई भी छोटा-मोटा अपराध हमें देखने में नहीं आया है। महाभारत युद्ध में अपने जाति-बंधुओं के संहार के सम्बन्ध में आपने दुर्योधन के जो अपराध का उल्लेख किया है, उसके सम्बन्ध में भी मैं आपसे निवेदन करूँगा।॥26 1/2॥
Kurunandan! We have not come across even the tiniest of crimes by you and your son. I will also make a request to you in relation to the crime of Duryodhan that you have mentioned regarding the massacre of your caste brothers in the Mahabharata war.॥ 26 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥