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mahabharat 15.10.22-23h: हे मनुष्यों के स्वामी! बुद्धिमान कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर एक हजार वर्ष तक धैर्यपूर्वक हमारी देखभाल करें और हम उनके राज्य में सुखपूर्वक रहें॥ 22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  15.10.22-23h 
तथा वर्षसहस्राणि कुन्तीपुत्रेण धीमता॥ २२॥
पाल्यमाना धृतिमता सुखं विन्दामहे नृप।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! बुद्धिमान कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर एक हजार वर्ष तक धैर्यपूर्वक हमारी देखभाल करें और हम उनके राज्य में सुखपूर्वक रहें॥ 22 1/2॥
 
O Lord of men! May the wise King Yudhishthira, the son of Kunti, patiently look after us for a thousand years and we may live happily in his kingdom.॥ 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)