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mahabharat 14.97.d88: श्रेष्ठ ब्राह्मण जो बड़ी मात्रा में दक्षिणा की आवश्यकता वाले यज्ञ करते हैं, वे हंसों और सारसों से सुसज्जित विमानों में उस मार्ग पर यात्रा करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d88
 
 
श्लोक  14.97.d88 
ये यजन्ति द्विजश्रेष्ठा: क्रतुभिर्भूरिदक्षिणै:।
हंससारससंयुक्तैर्यानैस्ते यान्ति तत्पथम्॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ ब्राह्मण जो बड़ी मात्रा में दक्षिणा की आवश्यकता वाले यज्ञ करते हैं, वे हंसों और सारसों से सुसज्जित विमानों में उस मार्ग पर यात्रा करते हैं।
 
The best Brahmins who perform sacrifices which require large amounts of Dakshina, travel on that route in aircrafts equipped with swans and cranes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)