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mahabharat 14.97.d83: जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को वश में करके तीसरे दिन यहाँ भोजन करते हैं, वे भी सोने के समान चमकते हुए हाथी द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर सवार होकर यमलोक को जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d83
 
 
श्लोक  14.97.d83 
तृतीयदिवसेनेह भुञ्जते ये जितेन्द्रिया:।
तेऽपि हस्तिरथैर्यान्ति तत्पथं कनकोज्ज्वलै:॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को वश में करके तीसरे दिन यहाँ भोजन करते हैं, वे भी सोने के समान चमकते हुए हाथी द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर सवार होकर यमलोक को जाते हैं।
 
Those men who have controlled their senses and eat here on the third day, they too go to Yamaloka riding on a chariot drawn by an elephant as bright as gold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)