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श्लोक  14.97.d64 
वैवस्वतं च पश्यन्ति सुखचित्तं सुखस्थितम्।
यमेन पूजिता यान्ति देवसालोक्यतां तत:॥
 
 
अनुवाद
वहाँ जाकर वे यमराज को प्रसन्नतापूर्वक बैठे हुए देखते हैं और उनके द्वारा सम्मानित होकर वे देवलोक के निवासी बन जाते हैं।
 
Going there, they see Yamraj sitting happily and being honoured by him, they become residents of Devalok.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)