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mahabharat 14.97.d55: जो मनुष्य सुगन्धित पुष्प और फल दान करते हैं, वे हंसों से सुसज्जित विमानों द्वारा धर्मराज की नगरी को जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d55
 
 
श्लोक  14.97.d55 
ये फलानि प्रयच्छन्ति पुष्पाणि सुरभीणि च।
हंसयुक्तैर्विमानैस्तु यान्ति धर्मपुरं नरा:॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सुगन्धित पुष्प और फल दान करते हैं, वे हंसों से सुसज्जित विमानों द्वारा धर्मराज की नगरी को जाते हैं।
 
Those people who donate fragrant flowers and fruits go to the city of Dharmaraja in planes equipped with swans.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)