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mahabharat 14.97.d47: हे पाण्डुपुत्र! जो लोग ब्राह्मणों को नाना प्रकार की वस्तुएं दान करते हैं, वे प्रसन्नतापूर्वक अपना फल प्राप्त करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.97.d47 
ब्राह्मणेभ्य: प्रदानानि नानारूपाणि पाण्डव।
ये प्रयच्छन्ति विप्रेभ्यस्ते सुखं यान्ति तत्फलम्॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! जो लोग ब्राह्मणों को नाना प्रकार की वस्तुएं दान करते हैं, वे प्रसन्नतापूर्वक अपना फल प्राप्त करते हैं।
 
O son of Pandu, those who donate various kinds of things to brahmins, reap their rewards happily.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)