Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.97.d43: यमलोक में पहुंचकर भी उन पापियों को जीवित ही मल के कुएं में फेंक दिया जाता है और वहां वे लाखों वर्षों तक नाना प्रकार से कष्ट भोगते रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d43
 
 
श्लोक  14.97.d43 
तत्र चापि गता: पापा विष्ठाकूपेष्वनेकश:।
जीवन्तो वर्षकोटीस्तु क्लिश्यन्ते वेदनात् तत:॥
 
 
अनुवाद
यमलोक में पहुंचकर भी उन पापियों को जीवित ही मल के कुएं में फेंक दिया जाता है और वहां वे लाखों वर्षों तक नाना प्रकार से कष्ट भोगते रहते हैं।
 
Even after reaching Yamaloka, those sinners are thrown alive into the well of feces and there they continue to suffer pain in various ways for millions of years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)