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mahabharat 14.97.d31: कुत्ते, बाघ, भेड़िये और कौवे उन पर चारों ओर से आक्रमण करते हैं। मांस काटने वाले राक्षस भी उन्हें कष्ट देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय  »  श्लोक d31
 
 
श्लोक  14.97.d31 
श्वभिर्व्याघ्रैर्वृकै: काकैर्भक्ष्यमाणा: समन्तत:।
तुद्यमानाश्च गच्छन्ति राक्षसैर्मांसघातिभि:॥
 
 
अनुवाद
कुत्ते, बाघ, भेड़िये और कौवे उन पर चारों ओर से आक्रमण करते हैं। मांस काटने वाले राक्षस भी उन्हें कष्ट देते हैं।
 
Dogs, tigers, wolves and crows attack them from all sides. Flesh-cutter demons also torment them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)