Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.97.d22-d23: पृथ्वी पर जो भी प्राणी हैं, चाहे वे देवता हों, दानव हों या यमराज के अधीन मनुष्य हों, चाहे वे पुरुष हों, स्त्री हों या किन्नर हों, बच्चे हों, बूढ़े हों, युवा हों या युवती हों, नवजात हों या गर्भ में हों, उन सभी को एक दिन उस महान पथ पर यात्रा करनी ही है। | mahabharat अध्याय 14.97: यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वी पर जो भी प्राणी हैं, चाहे वे देवता हों, दानव हों या यमराज के अधीन मनुष्य हों, चाहे वे पुरुष हों, स्त्री हों या किन्नर हों, बच्चे हों, बूढ़े हों, युवा हों या युवती हों, नवजात हों या गर्भ में हों, उन सभी को एक दिन उस महान पथ पर यात्रा करनी ही है।
Whatever living beings on Earth, be it the Gods, Demons or humans under the control of Yamaraja, be they men, women or eunuchs, children, old people, young or young, newly born or in the womb, they all have to travel on that great path one day.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥