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mahabharat 14.96.d44: जो व्यक्ति ब्राह्मण को पीटता है, उसके शरीर से रक्त निकालता है, उसकी हड्डियाँ तोड़ता है या उसका प्राण लेता है, वह अपने पापों का फल क्रमशः इक्कीस नरकों में भोगता है।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन  »  श्लोक d44
 
 
श्लोक  14.96.d44 
य: प्रहारं द्विजेन्द्राय दद्यात् कुर्याच्च शोणितम्।
अस्थिभङ्गं च य: कुर्यात् प्राणैर्वा विप्रयोजयेत् ।
सोऽऽनुपूर्व्येण यातीमान् नरकानेकविंशतिम्॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति ब्राह्मण को पीटता है, उसके शरीर से रक्त निकालता है, उसकी हड्डियाँ तोड़ता है या उसका प्राण लेता है, वह अपने पापों का फल क्रमशः इक्कीस नरकों में भोगता है।
 
The person who beats a Brahmin, drains his blood from his body, breaks his bones or takes his life, suffers the consequences of his sins in twenty-one hells respectively.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)