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श्लोक  14.96.d36 
यस्तान् पूजयति प्राज्ञो मद्‍गतेनान्तरात्मना।
तमहं स्वेन रूपेण पश्यामि नरपुङ्गव॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! जो बुद्धिमान पुरुष मुझमें मन लगाकर ब्राह्मणों की पूजा करता है, उसे मैं अपना ही स्वरूप मानता हूँ।
 
O best of men! I consider the wise man who worships the Brahmins by focusing his mind on me as my own form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)