युधिष्ठिर उवाच
त्रैलोक्यनाथ हे कृष्ण सर्वभूतात्मको ह्यसि।
नानायोगपर श्रेष्ठ तुष्यसे केन कर्मणा॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - त्रिलोकीनाथ! आप समस्त भूतों की आत्मा हैं। श्रीकृष्ण ही विभिन्न योगों से प्राप्त होने वाले सर्वश्रेष्ठ हैं! बताइए, आपको कौन-सा कर्म तृप्त करता है?
Yudhishthir asked – Trilokinath! You are the soul of all the ghosts. Shri Krishna is the best attainable through various Yogas! Tell me, which work makes you satisfied?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥