vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन
»
श्लोक d28
श्लोक
14.96.d28
तस्मात् तु सर्ववेदानां सावित्री प्राण उच्यते।
निर्जीवा हीतरे वेदा विना सावित्रिया नृप॥
अनुवाद
इसीलिए गायत्री को सम्पूर्ण वेदों का प्राण कहा गया है। नरेश्वर! गायत्री के बिना सारे वेद प्राणहीन हैं।
That is why Gayatri is called the life of the entire Vedas. Nareshwar! Without Gayatri all the Vedas are lifeless.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×