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mahabharat 14.96.d24: हे नरसिंह! जो श्रेष्ठ ब्राह्मण प्रतिदिन संध्यावंदन करते हैं, वे निःसंदेह ब्रह्मलोक को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.96.d24 
संध्यामुपासते ये वै नित्यमेव द्विजोत्तमा:।
ते यान्ति नरशार्दूल ब्रह्मलोकं न संशय:॥
 
 
अनुवाद
हे नरसिंह! जो श्रेष्ठ ब्राह्मण प्रतिदिन संध्यावंदन करते हैं, वे निःसंदेह ब्रह्मलोक को प्राप्त होते हैं।
 
O lion of men! Those excellent Brahmins who perform evening prayers every day, undoubtedly attain the Brahmaloka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)