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mahabharat 14.96.d22: प्रजापति मनु कहते हैं, 'तालमेल, स्वाध्याय, दान, शौच, सज्जनता और सरलता- ये गुण ब्राह्मण के लिए वेदों से भी बढ़कर हैं।'   |   mahabharat अध्याय 14.96: बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जपकी और ब्राह्मणोंकी महिमाका और उनके तिरस्कारके भयानक फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.96.d22 
शीलमध्ययनं दानं शौचं मार्दवमार्जवम्।
तस्माद् वेदाद् विशिष्टानि मनुराह प्रजापति:॥
 
 
अनुवाद
प्रजापति मनु कहते हैं, 'तालमेल, स्वाध्याय, दान, शौच, सज्जनता और सरलता- ये गुण ब्राह्मण के लिए वेदों से भी बढ़कर हैं।'
 
Prajapati Manu says, 'Synergy, self-study, charity, cleanliness, gentleness and simplicity - these virtues are greater than the Vedas for a Brahmin.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)