Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.93.d8-d13: और जो ब्रह्मा, कार्तिकेय, धूमायन, कंड, वैश्वानर, भार्गव, याज्ञवल्क्य और मार्कंडेय ने भी कहा है और जो भारद्वाज और बृहस्पति द्वारा बनाया गया है और जो कुनि, कुनिबाहु, विश्वामित्र, सुमन्तु, जैमिनी, शकुनि, पुलस्त्य, पुलह, अग्नि, अगस्त्य, मुद्गल, शांडिल्य, शलभ, बाल्खिल्यगण ने लिखा है, वह सप्तर्षि ने भी सुना है, आपस्तंब, शंख, लिखित, प्रजापति, यम, महेंद्र, व्याघ्र, व्यास और विभांडक। | mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मणा कथिता ये च कौमाराश्च श्रुता मया।
धूमायनकृता धर्मा: काण्डवैश्वानरा अपि॥
भार्गवा याज्ञवल्क्याश्च मार्कण्डेयकृता अपि।
भारद्वाजकृता ये च बृहस्पतिकृताश्च ये॥
कुणेश्च कुणिबाहोश्च विश्वामित्रकृताश्च ये।
सुमन्तुजैैमिनिकृता: शाकुनेयास्तथैव च॥
पुलस्त्यपुलहोद्गीता: पावकीयास्तथैव च।
अगस्त्यगीता मौद्गल्या: शाण्डिल्या: शलभायना:॥
बालखिल्यकृता ये च ये च सप्तर्षिभिस्तथा।
आपस्तम्बकृता धर्मा: शंखस्य लिखितस्य च॥
प्राजापत्यास्तथा याम्या माहेन्द्राश्च श्रुता मया।
वैयाघ्रव्यासकीयाश्च विभाण्डककृताश्च ये॥
अनुवाद
और जो ब्रह्मा, कार्तिकेय, धूमायन, कंड, वैश्वानर, भार्गव, याज्ञवल्क्य और मार्कंडेय ने भी कहा है और जो भारद्वाज और बृहस्पति द्वारा बनाया गया है और जो कुनि, कुनिबाहु, विश्वामित्र, सुमन्तु, जैमिनी, शकुनि, पुलस्त्य, पुलह, अग्नि, अगस्त्य, मुद्गल, शांडिल्य, शलभ, बाल्खिल्यगण ने लिखा है, वह सप्तर्षि ने भी सुना है, आपस्तंब, शंख, लिखित, प्रजापति, यम, महेंद्र, व्याघ्र, व्यास और विभांडक।
And which are also said by Brahma, Kartikeya, Dhumayan, Kanda, Vaishwanar, Bhargava, Yajnavalkya and Markandeya and which are made by Bhardwaj and Brihaspati and which are written by Kuni, Kunibahu, Vishwamitra, Sumantu, Jaimini, Shakuni, Pulastya, Pulah, Agni, Agastya, Mudgal, Shandilya, Shalabh, Balkhilyagana, I have also heard what has been said by Saptarishi, Apastamba, Shankha, Likhit, Prajapati, Yama, Mahendra, Vyaghra, Vyas and Vibhandaka.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥