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mahabharat 14.93.d61: अधिक कहने से क्या लाभ, मैं तो आपसे सत्य कह रहा हूँ कि जो कुछ भी भूत और भविष्य है, वह सब मैं ही हूँ।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d61 
किं चात्र बहुनोक्तेन सत्यमेतद् ब्रवीमि ते।
यद् भूतं यद् भविष्यच्च तत् सर्वमहमेव तु॥
 
 
अनुवाद
अधिक कहने से क्या लाभ, मैं तो आपसे सत्य कह रहा हूँ कि जो कुछ भी भूत और भविष्य है, वह सब मैं ही हूँ।
 
What is the use of saying more, I am telling you the truth that whatever is past and future, I am all that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)