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mahabharat 14.93.d46: ‘युधिष्ठिर! यह संसार जो द्वीपों, समुद्रों और वनों से भरा हुआ है और उन सबको धारण करता है, मेरे दो चरणों के स्थान पर है।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d46 
पृथिवीमण्डलं यद् वै द्वीपार्णववनैर्युतम्।
सर्वसंधारणोपेतं पादौ मम युधिष्ठिर॥
 
 
अनुवाद
‘युधिष्ठिर! यह संसार जो द्वीपों, समुद्रों और वनों से भरा हुआ है और उन सबको धारण करता है, मेरे दो चरणों के स्थान पर है।
 
‘Yudhishthira! This world which is filled with islands, oceans and forests and supports them all is at the place of my two feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)