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mahabharat 14.93.d44: आकाश को मेरा सिर समझो। सूर्य और चंद्रमा मेरे नेत्र हैं। गौ, अग्नि और ब्राह्मण मेरे मुख हैं और वायु मेरी श्वास है।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d44 
मूर्द्धानं मे विद्धि दिवं चन्द्रादित्यौ च लोचने।
गावोऽग्निर्ब्राह्मणो वक्त्रं मारुत: श्वसनं च मे॥
 
 
अनुवाद
आकाश को मेरा सिर समझो। सूर्य और चंद्रमा मेरे नेत्र हैं। गौ, अग्नि और ब्राह्मण मेरे मुख हैं और वायु मेरी श्वास है।
 
‘Consider the heaven as my head. The sun and the moon are my eyes. The cow, fire and the Brahmin are my mouth and the air is my breath.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)