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mahabharat 14.93.d43: मैं, अव्यक्त परमेश्वर, तमोगुण का आधार हूँ, रजोगुण के भीतर स्थित हूँ और श्रेष्ठ सत्त्वगुण में भी व्याप्त हूँ। मुझमें लोभ नहीं है। मैं ब्रह्मा से लेकर छोटे से छोटे कीड़े तक, सबमें व्याप्त हूँ।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d43 
तमोमूलोऽहमव्यक्तो रजोमध्ये प्रतिष्ठित:।
ऊर्ध्वं सत्त्वं विना लोभं ब्रह्मादिस्तम्बपर्यत:॥
 
 
अनुवाद
मैं, अव्यक्त परमेश्वर, तमोगुण का आधार हूँ, रजोगुण के भीतर स्थित हूँ और श्रेष्ठ सत्त्वगुण में भी व्याप्त हूँ। मुझमें लोभ नहीं है। मैं ब्रह्मा से लेकर छोटे से छोटे कीड़े तक, सबमें व्याप्त हूँ।
 
‘I, the unmanifested Supreme Lord, am the basis of the Tamoguna, situated within Rajoguna and also pervading the superior Sattvaguna. I have no greed. I pervade everything, from Brahma to the smallest insect.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)