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mahabharat 14.93.d39: पाण्डव! जब मैं अवतार लेता हूँ, तब मेरा दिव्य रूप प्रकट होता है। संसार के सभी प्राणी नाना प्रकार की वस्तुओं से उसकी पूजा करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.93.d39 
अपरं यच्च मे रूपं प्रादुर्भावेषु दृश्यते।
तदर्चयन्ति सर्वार्थै: सर्वभूतानि पाण्डव॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव! जब मैं अवतार लेता हूँ, तब मेरा दिव्य रूप प्रकट होता है। संसार के सभी प्राणी नाना प्रकार की वस्तुओं से उसकी पूजा करते हैं।
 
‘Pandava! My divine form is visible when I take incarnation. All the living beings of the world worship it with all kinds of objects.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)