Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.93.d24: यदि इस शुद्ध धर्म का सेवन किया जाए, तो यह महान भय से रक्षा करता है। धर्म के द्वारा ही मनुष्य ब्राह्मणत्व और देवत्व को प्राप्त करता है। धर्म ही मनुष्य को शुद्ध करता है।   |   mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान‍् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d24
 
 
श्लोक  14.93.d24 
धर्मोऽयं सेवित: शुद्धस्त्रायते महतो भयात्।
धर्माद् द्विजत्वं देवत्वं धर्म: पावयते नरम्॥
 
 
अनुवाद
यदि इस शुद्ध धर्म का सेवन किया जाए, तो यह महान भय से रक्षा करता है। धर्म के द्वारा ही मनुष्य ब्राह्मणत्व और देवत्व को प्राप्त करता है। धर्म ही मनुष्य को शुद्ध करता है।
 
If this pure Dharma is consumed, it protects from great fear. It is only through religion that man attains Brahmanism and divinity. Only religion purifies man.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)