Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.93.d14-d16: मैंने नारद, कपोत, विदुर, भृगु, अंगिरा, क्रौंच, मृदंग, सूर्य, हरित, पिशंग, कपोत, सुबालक, उद्दालक, शुक्राचार्य, वैशम्पायन और अन्य महान आत्माओं की शिक्षाओं को भी शुरू से अंत तक सुना है। | mahabharat अध्याय 14.93: युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा धर्मका तथा अपनी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारदीया: श्रुता धर्मा: कापोताश्च श्रुता मया।
तथा विदुरवाक्यानि भृगोरङ्गिरसस्तथा॥
क्रौञ्चा मृदङ्गगीताश्च सौर्या हारीतकाश्च ये।
ये पिशङ्गकृताश्चापि कापोतीया: सुबालका:॥
उद्दालककृता धर्मा औशनस्यास्तथैव च।
वैशम्पायनगीताश्च ये चान्येऽप्येवमादित:॥
अनुवाद
मैंने नारद, कपोत, विदुर, भृगु, अंगिरा, क्रौंच, मृदंग, सूर्य, हरित, पिशंग, कपोत, सुबालक, उद्दालक, शुक्राचार्य, वैशम्पायन और अन्य महान आत्माओं की शिक्षाओं को भी शुरू से अंत तक सुना है।
I have also heard from beginning to end the teachings of Narada, Kapota, Vidura, Bhrigu, Angira, Krauncha, Mridanga, Surya, Harit, Pishanga, Kapota, Subalaka, Uddalaka, Shukracharya, Vaishampayana and other great souls.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥