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mahabharat 14.92.5: महाराज! बहुत समय पहले की बात है कि अगस्त्य ऋषि ने, जो अत्यन्त शक्तिशाली तथा समस्त जीवों के कल्याण में तत्पर थे, एक बार एक ऐसा यज्ञ करने की दीक्षा ली जो बारह वर्षों में पूर्ण होने वाला था।   |   mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  14.92.5 
पुरागस्त्यो महातेजा दीक्षां द्वादशवार्षिकीम्।
प्रविवेश महाराज सर्वभूतहिते रत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! बहुत समय पहले की बात है कि अगस्त्य ऋषि ने, जो अत्यन्त शक्तिशाली तथा समस्त जीवों के कल्याण में तत्पर थे, एक बार एक ऐसा यज्ञ करने की दीक्षा ली जो बारह वर्षों में पूर्ण होने वाला था।
 
Maharaj! It happened long ago that the sage Agastya, who was very powerful and devoted to the welfare of all living beings, once took initiation in performing a yajna that would be completed in twelve years. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)