श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  14.92.48 
यान्समुद्दिश्य संकल्प: पयसोऽस्य कृतो मया।
पितरस्ते महाभागास्तेभ्यो बुद्धॺस्व गम्यताम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जिनके हितार्थ मैंने इस दूध को पीने का संकल्प किया था, वे महान् पितर ही इसके स्वामी हैं। तुम जाकर उनसे यह बात समझो ॥48॥
 
The great forefathers for whose sake I had resolved to consume this milk are its masters. Go and understand this matter from them. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)