Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.92.44: राजन! ऋषि ने उस क्रोध को पहचान लिया; परन्तु वे क्रोधित नहीं हुए। तब क्रोध ने ब्राह्मण का रूप धारण कर लिया। ऋषि द्वारा पराजित होने पर उस कुपित क्रोध ने भृगुश्रेष्ठ से कहा-॥44॥ | mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमाज्ञाय मुनि: क्रोधं नैवास्य स चुकोप ह।
स तु क्रोधस्ततो राजन् ब्राह्मणीं मूर्तिमास्थित:।
जिते तस्मिन् भृगुश्रेष्ठमभ्यभाषदमर्षण:॥ ४४॥
अनुवाद
राजन! ऋषि ने उस क्रोध को पहचान लिया; परन्तु वे क्रोधित नहीं हुए। तब क्रोध ने ब्राह्मण का रूप धारण कर लिया। ऋषि द्वारा पराजित होने पर उस कुपित क्रोध ने भृगुश्रेष्ठ से कहा-॥44॥
King! The sage recognized that anger; but he did not get angry. Then the anger assumed the form of a Brahmin. On being defeated by the sage, that infuriated anger said to the best of Bhrigu -॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥