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श्लोक 14.92.40  |
वैशम्पायन उवाच
एतत् पूर्वं न पृष्टोऽहं न चास्माभि: प्रभाषितम्।
श्रूयतां नकुलो योऽसौ यथा वाक् तस्य मानुषी॥ ४०॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायन बोले, "हे राजन! यह प्रश्न न तो आपने पहले पूछा था और न ही मैंने आपको बताया था। अब जब आप पूछ ही रहे हैं तो सुनिए। मैं आपको बताता हूँ कि नकुल कौन थे और वे किस प्रकार मनुष्यों की भाँति बोलते थे।" |
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| Vaishampayana said, "O King! You had neither asked this question before nor did I tell you. Now that you are asking, listen. I am telling you who Nakul was and how he spoke like a human being. |
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