श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  14.92.39 
जनमेजय उवाच
कोऽसौ नकुलरूपेण शिरसा काञ्चनेन वै।
प्राह मानुषवद् वाचमेतत् पृष्टो वदस्व मे॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा, "ऋषिवर! वह सुनहरे सिर वाला और मनुष्य की तरह बोलने वाला नेवला कौन था? कृपया मेरे इस प्रश्न का उत्तर दीजिए।"
 
Janamejaya asked, "Sage! Who was that mongoose with a golden head who spoke like a human being? Please answer this question of mine."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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