Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.92.17-18h: यदि इन्द्र बारह वर्ष तक वर्षा न करें, तो मैं केवल विचार करके मानसिक यज्ञ करूँगा। यही यज्ञ करने की सनातन विधि है॥17 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि द्वादशवर्षाणि न वर्षिष्यति वासव:॥ १७॥
चिन्तायज्ञं करिष्यामि विधिरेष सनातन:।
अनुवाद
यदि इन्द्र बारह वर्ष तक वर्षा न करें, तो मैं केवल विचार करके मानसिक यज्ञ करूँगा। यही यज्ञ करने की सनातन विधि है॥17 1/2॥
‘If Indra does not rain for twelve years, then I will perform a mental yajna by merely thinking. This is the eternal method of performing yajna.॥ 17 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥