Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.92.12: राजन! जब यज्ञ-अनुष्ठान के बीच में विराम हो गया, तब शुद्ध हृदय वाले ऋषिगण एक स्थान पर एकत्र होकर बैठ गए, तब वे इस प्रकार महामना अगस्त्य के विषय में चर्चा करने लगे -॥12॥   |   mahabharat अध्याय 14.92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.92.12 
तत: कर्मान्तरे राजन्नगस्त्यस्य महात्मन:।
कथेयमभिनिर्वृत्ता मुनीनां भावितात्मनाम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजन! जब यज्ञ-अनुष्ठान के बीच में विराम हो गया, तब शुद्ध हृदय वाले ऋषिगण एक स्थान पर एकत्र होकर बैठ गए, तब वे इस प्रकार महामना अगस्त्य के विषय में चर्चा करने लगे -॥12॥
 
King! Then, when there was a break in the middle of the sacrificial rituals, the sages with pure hearts gathered together and sat in one place, then they started discussing about the great Agastya in the following manner -॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)