श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.90.9 
तत: समेत्य नकुलं पर्यपृच्छन्त ते द्विजा:।
कुतस्त्वं समनुप्राप्तो यज्ञं साधुसमागमम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तब वे सभी ब्राह्मण उस नेवले के पास गए और उसे चारों ओर से घेरकर पूछा - 'नकुल! इस यज्ञ में तो केवल पुण्यात्मा पुरुष ही एकत्र हुए हैं, तुम कहाँ से आये हो?'॥9॥
 
Then all those Brahmins went to that mongoose and surrounded him from all sides and asked - 'Nakul! Only virtuous men have gathered in this sacrifice, where did you come from?'॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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