श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 87-88h
 
 
श्लोक  14.90.87-88h 
ब्रह्मचर्येण दानेन यज्ञेन तपसा तथा॥ ८७॥
असंकरेण धर्मेण तस्माद् गच्छ दिवं द्विज।
 
 
अनुवाद
अतः ब्रह्मन्! तुम अपने ब्रह्मचर्य, दान, यज्ञ, तप और वर्णसंकर धर्म के प्रभाव से स्वर्ग जाओ। 87 1/2॥
 
So Brahman! You go to heaven with the influence of your celibacy, charity, sacrifice, penance and religion without hybridity. 87 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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