श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 86-87h
 
 
श्लोक  14.90.86-87h 
पितृलोकगता: सर्वे तारिता: पितरस्त्वया॥ ८६॥
अनागताश्च बहव: सुबहूनि युगान्युत।
 
 
अनुवाद
‘तुमने पितृलोक में गए हुए अपने समस्त पितरों का उद्धार कर दिया है। आगे अनेक युगों तक जो सन्तानें उत्पन्न होंगी, वे भी तुम्हारे पुण्य से उद्धार पाएँगी।’॥86 1/2॥
 
‘You have saved all your forefathers who have gone to Pitriloka. The children who will be born in the future for many ages will also be saved by your good deeds.’॥ 86 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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