श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  14.90.76 
स्नुषोवाच
गुरोर्मम गुरुस्त्वं वै यतो दैवतदैवतम्।
देवातिदेवस्तस्मात् त्वं सक्तूनादत्स्व मे प्रभो॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
बहू बोली - हे प्रभु! आप मेरे गुरु के भी गुरु हैं, देवों के भी देव हैं और सामान्य देवताओं से भी श्रेष्ठ हैं। अतः आप मेरे द्वारा अर्पित यह सत्तू स्वीकार करें॥ 76॥
 
The daughter-in-law said - O Lord! You are my Guru's Guru, the God of Gods and a God far superior to the ordinary Gods. So please accept this Sattu offered by me. ॥ 76॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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