श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  14.90.75 
बाला क्षुधार्ता नारी च रक्ष्या त्वं सततं मया।
उपवासपरिश्रान्ता त्वं हि बान्धवनन्दिनी॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
एक तो तुम अभी बालक हो, दूसरे तुम भूख से पीड़ित हो, तीसरे तुम स्त्री हो और चौथे तुम उपवास के कारण बहुत दुबली हो गई हो; इसलिए मुझे सदैव तुम्हारी रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि तुम अपनी सेवा से अपने संबंधियों को प्रसन्न करोगी।
 
Firstly, you are still a child, secondly, you are suffering from hunger, thirdly, you are a woman and fourthly, you have become very thin due to fasting; therefore, I must always protect you, because you will make your relatives happy by your services. 75.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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