श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  14.90.70 
धर्माद्या हि यथा त्रेता वह्नित्रेता तथैव च।
तथैव पुत्रपौत्राणां स्वर्गस्त्रेता किलाक्षय:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
‘जैसे धर्म, अर्थ और काम मिलकर – ये तीनों स्वर्ग को प्राप्त करने वाले हैं तथा जैसे आहवनीय, गार्हपत्य और दक्षिणाग्नि – ये तीन स्वर्ग के साधन हैं, वैसे ही पुत्र, पौत्र और प्रपौत्र – ये तीन संतानें सनातन स्वर्ग को प्राप्त करने वाली हैं ॥70॥
 
‘Just as religion and the artha and kama combined with it – these three are the ones who will attain heaven and just as Ahavaniya, Garhapatya and Dakshinagni – these three are the means of heaven, in the same way son, grandson and great grandson – these three children are going to attain the eternal heaven. 70॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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