श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  14.90.7 
सक्तुप्रस्थेन वो नायं यज्ञस्तुल्यो नराधिपा:।
उञ्छवृत्तेर्वदान्यस्य कुरुक्षेत्रनिवासिन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे राजाओं! तुम्हारा यह यज्ञ कुरुक्षेत्र के एक उदार ब्राह्मण द्वारा दिए गए एक किलो सत्तू के दान के बराबर भी नहीं है।’ ॥7॥
 
O kings, this sacrifice of yours is not even equal to the donation of a kilo of gram flour (sattu) by a generous Brahmin of Kurukshetra.' ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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