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श्लोक 14.90.68  |
संतानात् तव संतानं मम विप्र भविष्यति।
सक्तूनिमानतिथये गृहीत्वा सम्प्रयच्छ मे॥ ६८॥ |
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| अनुवाद |
| हे ब्राह्मण! तुम्हारी सन्तान से मुझे सन्तान प्राप्त होगी; इसलिए तुम मेरे लिए परम पूज्य हो। मेरे भाग से यह सत्तू लेकर अतिथिदेव को अर्पित करो। 68. |
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| O Brahmin! I will get a child from your child; therefore you are most revered by me. Take this sattu from my share and offer it to the guest god. 68. |
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