श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  14.90.68 
संतानात् तव संतानं मम विप्र भविष्यति।
सक्तूनिमानतिथये गृहीत्वा सम्प्रयच्छ मे॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! तुम्हारी सन्तान से मुझे सन्तान प्राप्त होगी; इसलिए तुम मेरे लिए परम पूज्य हो। मेरे भाग से यह सत्तू लेकर अतिथिदेव को अर्पित करो। 68.
 
O Brahmin! I will get a child from your child; therefore you are most revered by me. Take this sattu from my share and offer it to the guest god. 68.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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