श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  14.90.64 
पितोवाच
रूपेण सदृशस्त्वं मे शीलेन च दमेन च।
परीक्षितश्च बहुधा सक्तूनादद्मि ते सुत॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
पिता ने कहा, "पुत्र! तुम रूप, चरित्र (सदाचार और अच्छा आचरण) और संयम की दृष्टि से मेरे समान हो। मैंने तुम्हारे इन गुणों की अनेक बार परीक्षा की है, इसलिए मैं तुम्हारा सत्तू ग्रहण करता हूँ।"
 
The father said, "Son! You are like me in terms of beauty, character (virtue and good conduct) and self-control. I have tested these qualities of yours many times, so I take your Sattu. 64.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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