श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  14.90.60 
पितोवाच
अपि वर्षसहस्री त्वं बाल एव मतो मम।
उत्पाद्य पुत्रं हि पिता कृतकृत्यो भवेत् सुतात् ॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
पिता ने कहा, "बेटा! यदि तुम एक हजार वर्ष के हो जाओ, तो भी तुम हमारे लिए बालक ही रहोगे। पुत्र को जन्म देकर पिता अपने को धन्य समझता है।"
 
The father said, "Son! Even if you become a thousand years old, you are still a child to us. A father considers himself blessed by giving birth to a son." 60.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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