श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  14.90.6 
सकृदुत्सृज्य तन्नादं त्रासयानो मृगद्विजान्।
मानुषं वचनं प्राह धृष्टो बिलशयो महान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
बिल में रहने वाला वह निर्लज्ज और महान नेवला एक बार इस प्रकार गर्जना करके समस्त मृगों और पक्षियों को भयभीत कर दिया और फिर मनुष्य भाषा में बोला -॥6॥
 
That impudent and great mongoose that lived in the burrow roared like this once and frightened all the deer and birds and then said in human language -॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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