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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना
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श्लोक 59
श्लोक
14.90.59
प्राणधारणमात्रेण शक्यं कर्तुं तपस्त्वया।
प्राणो हि परमो धर्म: स्थितो देहेषु देहिनाम्॥ ५९॥
अनुवाद
केवल प्राणशक्ति को धारण करके ही तुम तप कर सकते हो। देहधारियों के शरीर में विद्यमान प्राणशक्ति ही परम धर्म है ॥59॥
You can perform penance merely by retaining the life force. The life force present in the bodies of embodied beings is the ultimate religion. ॥ 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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