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श्लोक 14.90.54-55h  |
इत्युक्त: स तया सक्तून् प्रगृह्येदं वचोऽब्रवीत्॥ ५४॥
द्विज सक्तूनिमान् भूय: प्रतिगृह्णीष्व सत्तम। |
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| अनुवाद |
| पत्नी के ऐसा कहने पर ब्राह्मण ने सत्तू लेकर अतिथि से कहा - 'हे मुनिश्रेष्ठ ब्राह्मण! कृपया यह सत्तू पुनः ग्रहण करें।' ॥54 1/2॥ |
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| On his wife saying this, the Brahmin took the sattu and said to the guest - 'O best of the saints, Brahmin! Please take this sattu again.' ॥ 54 1/2॥ |
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