श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  14.90.52-53h 
पालनाद्धि पतिस्त्वं मे भर्तासि भरणाच्च मे॥ ५२॥
पुत्रप्रदानाद् वरदस्तस्मात् सक्तून् प्रयच्छ मे।
 
 
अनुवाद
आप मेरे पति हैं, क्योंकि आपने मेरा पालन-पोषण किया है, आप मेरे आधार हैं, क्योंकि आपने मुझे जीविका प्रदान की है और आप वरदाता हैं, क्योंकि आपने मुझे पुत्र प्रदान किया है। अतः मेरे भाग का सत्तू अतिथिदेव को अर्पित कीजिए। ॥52 1/2॥
 
You are my husband because you have nurtured me, you are my support because you have provided me with sustenance and you are the giver of blessings because you have bestowed me with a son. Therefore, offer my share of sattu to the guest god. ॥ 52 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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